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Panchang · हिन्दी

आज का पंचांग

शनिवार · नई दिल्ली · वास्तविक ग्रह स्थितियों से गणना, हर घंटे अपडेट · English

तिथि

कृष्ण Pratipada

10% शेष

वार

शनिवार

स्वामी: शनि

नक्षत्र

Purva Bhadrapada

पद 1 · स्वामी गुरु

योग

Dhriti

करण

Kaulava

चंद्र राशि

Kumbha

सूर्य: Simha

सूर्योदय

5:57 AM

सूर्यास्त

6:48 PM

शुभ-अशुभ समय

राहु काल

9:10 AM – 10:46 AM

नए कार्य की शुरुआत टालें

यमगंड

1:59 PM – 3:35 PM

नए कार्य की शुरुआत टालें

गुलिक काल

5:57 AM – 7:34 AM

नए कार्य की शुरुआत टालें

अभिजीत मुहूर्त

11:58 AM – 12:46 PM

लगभग सभी कार्यों के लिए शुभ

पंचांग कैसे पढ़ें

पंचांग वैदिक ज्योतिष का दैनिक कैलेंडर है, जो एक हज़ार से अधिक वर्षों से भारत में प्रतिदिन उपयोग होता आ रहा है। इसके पांच अंग हैं: तिथि यानी चंद्र दिवस, वार और उसका स्वामी ग्रह, नक्षत्र यानी चंद्रमा का वर्तमान तारा, योग यानी सूर्य-चंद्र का संयोग, और करण यानी आधी तिथि। विवाह, गृह प्रवेश, व्यापार आरंभ और यात्रा जैसे सभी महत्वपूर्ण कार्यों का मुहूर्त इन्हीं पांच अंगों को मिलाकर निकाला जाता है।

राहु काल में नई शुरुआत टालने की परंपरा है, जबकि अभिजीत मुहूर्त लगभग हर कार्य के लिए शुभ माना जाता है। सभी 27 नक्षत्रों की जानकारी नक्षत्र लाइब्रेरी में पढ़ें, अपना जन्म नक्षत्र निःशुल्क कुंडली कैलकुलेटर से जानें, और विवाह के लिए गुण मिलान कुंडली मिलान पृष्ठ पर करें।

Purva Bhadrapada · Birth Chart · कुंडली मिलान · आज का राशिफल

पंचांग से जुड़े प्रश्न

पंचांग क्या होता है?
पंचांग हिन्दू कैलेंडर है जिसके पांच अंग होते हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र (चंद्रमा का तारा), योग (सूर्य-चंद्र का संयोग) और करण (आधी तिथि)। ये पांचों मिलकर किसी भी दिन का ज्योतिषीय स्वरूप बताते हैं।
राहु काल में क्या नहीं करना चाहिए?
राहु काल में नए कार्य की शुरुआत, यात्रा प्रारंभ, खरीदारी और शुभ कार्य टालने की परंपरा है। पहले से चल रहे काम जारी रखे जा सकते हैं; केवल नई शुरुआत वर्जित मानी जाती है।
आज की तिथि कैसे निकाली जाती है?
चंद्रमा और सूर्य के बीच की कोणीय दूरी से। हर 12 अंश की दूरी एक तिथि है, इस तरह एक चंद्र मास में 30 तिथियां होती हैं: शुक्ल पक्ष की 15 और कृष्ण पक्ष की 15।
अभिजीत मुहूर्त कब होता है?
स्थानीय दोपहर के आसपास लगभग 48 मिनट का समय अभिजीत मुहूर्त कहलाता है। इसे विवाह को छोड़कर लगभग सभी शुभ कार्यों के लिए उत्तम माना जाता है।
यह पंचांग किस स्थान के लिए है?
इस पृष्ठ के समय नई दिल्ली (IST) के लिए हैं। तिथि, नक्षत्र, योग और करण पूरे भारत में समान रहते हैं; केवल सूर्योदय से जुड़े राहु काल जैसे समय शहर के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे होते हैं।
यह पंचांग कैसे गणना किया जाता है?
वास्तविक खगोलीय गणना से: सूर्य-चंद्र की स्थितियां खगोलीय एफेमेरिस से ली जाती हैं और लाहिरी अयनांश से नक्षत्र निकाला जाता है, वही पद्धति जो पारंपरिक पंचांग प्रकाशक उपयोग करते हैं।